आचार्य महाश्रमण जी द्वारा घोषित प्रेक्षा ध्यान कल्याण वर्ष के अंतर्गत अभातेममं द्वारा निर्देशित मध्य दिल्ली महिला मंडल ने तेरापंथ भवन, शास्त्री नगर में प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला में दो सिंधाड़ों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। शासनश्री साध्वीश्री ललित प्रभा जी ठाणा 3 और प्रबुद्ध साध्वीश्री संगीतश्री जी ठाणा-4 के सान्निध्य में संपन्न हुई।
कार्यक्रम की मंगल शुरुआत शासनश्री साध्वीश्री ललित प्रभा जी द्वारा नमस्कार महामंत्र के मंगल उच्चारण से हुई। साध्वीश्री संगीतश्री जी ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि प्रेक्षाध्यान आज के समय की मांग है। उन्होंने एक कहानी के माध्यम से समझाया और कहा कि ध्यान के माध्यम से हर समस्या का समाधान संभव है। मंडल की बहनों ने प्रेरणा गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अध्यक्ष दीपिका छल्लानी ने स्वागत भाषण में प्रेक्षाध्यान को आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ की अनुपम देन बताते हुए सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
आध्यात्म साधना केंद्र, महरौली से पधारे प्रेक्षा प्रशिक्षक श्रीमती राज जी गुनेचा ने प्रेक्षा गीत द्वारा प्रेक्षाध्यान का अर्थ, इतिहास और इसकी जीवनशैली पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने दीर्घ श्वास प्रेक्षा, प्रेक्षाचर्या के सूत्रों, और ध्यान के माध्यम से आत्म-परिवर्तन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
प्रशिक्षिका गरीमा जी पाठक ने सुष्म योगासन के महत्व को बताया और प्रयोग कराया, जिसे सभी ने आत्मलीनता के साथ किया। शासनश्री साध्वीश्री ललित प्रभा जी ने महिला मंडल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन समय-समय पर करने की बात कही। कार्यशाला का संचालन मंत्री सुमन बरडिया ने कुशलतापूर्वक किया।
कार्यशाला में मध्य दिल्ली महिला मण्डल से 45 बहनें और 8 भाइयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पश्चिम दिल्ली महिला मंडल की अध्यक्षा रीटा जी और 2 बहनों की भी उपस्थिति रही। मध्य दिल्ली की बहनों के अथक प्रयासों से यह कार्यशाला अत्यंत सफल रही। समापन साध्वीश्री जी द्वारा मंगलपाठ के श्रवण के साथ हुआ। श्रीमती राज जी गुणेचा और गरीमा जी पाठक का शॉल भेंट कर सम्मान किया गया।
