साध्वीश्री डॉ संपूर्णयशाजी आदि ठाणा‘5 के सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ भवन में मंगल भावना समारोह का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम साध्वी डॉ. संपूर्णयशाजी ने नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ साध्वी श्री महकप्रभा जी ने मधुर गीतिका के माध्यम से अपने भावों को प्रस्तुत किया। साध्वी श्री संवरप्रभाजी ने कहा कि आज चातुर्मास परिसंपन्नता की ओर है और कल हम यहां से विहार करेंगे बाड़मेर धर्म के क्षेत्र में बड़ा अच्छा क्षेत्र है बाड़मेर पर गुरुदेव की हमेशा कृपा बनी रहती है। साध्वीश्री जी का यह 101 वर्ष का बाड़मेर में चातुर्मास है यहां पर इसी तरह धर्म की गंगा बहती रहे, ऐसी मंगलकामना करती हूं साध्वीश्री जी ने मोहनलाल जी स्वामी के प्रसंग के माध्यम से अपनी बात कही यह चातुर्मास सभी साध्वियों का आध्यात्मिक धार्मिक तप और जप में वृद्धि हुई है। साध्वीश्री डॉ संपूर्णयशाजी ने राजा परदेसी का आख्यान सुनाते हुए कहा कि जब विहार किया जाता है उससे पहले राजा परदेसी का आख्यान करना जरूरी होता है, क्योंकि राजा श्रेणिक एक कूर राजा था वह अपनी प्रजा पर अनेक प्रकार के अत्याचार करता था वह आत्मा व शरीर को एक मानता था और कुमार श्रमणकेशी व्यक्तित्व वर्णन बताया जाता है राजा श्रेणिक मुनिश्री जी से वार्तालाप कर अपने भावों को बदलता है व कूर राजा से धार्मिक राजा बना व नास्तिक से एक आस्तिक बन जाता है व आत्मा और शरीर दोनों ही अलग-अलग मानता है।
कार्यक्रम में तेरापंथ सभा अध्यक्ष गौतम भंसाली, मंत्री गौतम बोथरा, रूपेश मालू, पुखराज बोकडिया, जगदीश सेन आदि ने शब्दों के माध्यम से अपने भाव को प्रस्तुत किया। तेरापंथ महिला मंडल व कन्या मंडल की सदस्यों ने सामूहिक गीतिका के माध्यम से अपने भावों की प्रस्तुति दी।



