ज्ञानशाला प्रशिक्षक परीक्षा (विज्ञ, स्नातक) अणुव्रत भवन में आयोजित की गई। साध्वीश्री डॉ कुंदन रेखा जी ने अपने मंगल उद्बोधन में परीक्षार्थियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि संस्कार हमारी नींव है। परीक्षा से आप डरे नहीं, भय रहित होकर लिखते जाओ और भिक्खु स्याम भिक्खु स्याम रटते जाओ।
साध्वीश्री जी ने कहा बाहरी नम्बर तो आये ही, हमारे भीतरी नम्बर भी 100 प्रतिशत आये, तभी हमारा सम्पूर्ण ज्ञानार्जन सार्थक बनेगा। आपश्री ने कहा कि गुरुदेव ने 2027 का चातुर्मास दिल्ली फरमाया है अतः आप सबको अभी से पूर्ण जागरूक होकर गुरुदेव के आगमन की तैयारियों में लग जाना है। मंगल पाठ सुनाते हुए सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
साध्वीश्री जी के सान्निध्य में दिल्ली ज्ञानशाला परामर्शक श्रीमान रतनलाल जी जैन, दिल्ली ज्ञानशाला संयोजक एवं आंचलिक संयोजक (दिल्ली एनसीआर यूपी अंचल) श्री महिम बोथरा की उपस्थिति में ’परीक्षा प्रश्नपत्र’ खोला गया।
ज्ञानशाला प्रकोष्ठ केंद्रीय सदस्या एवं दिल्ली ज्ञानशाला परामर्शिका श्रीमती सरोज जी छाजेड़, दिल्ली ज्ञानशाला के परामर्शक श्रीमान रतनलाल जी जैन, दिल्ली ज्ञानशाला संयोजक एवं आंचलिक संयोजक (दिल्ली, एनसीआर यूपी अंचल) श्री महिम बोथरा, सह आंचलिक संयोजक श्री मनीष पुगलिया, परीक्षा व्यवस्थापक श्री अशोक सेठिया, दिल्ली ज्ञानशाला सह संयोजिका श्रीमती श्वेता हीरावत की उपस्थिति में पूर्ण जागरूकता एवं नीति नियम को ध्यान में रखते हुए परीक्षा निर्धारित समयानुसार शुरु की गई।
पूरी जागरूकता एवं प्रामाणिकता के साथ सौहार्द पूर्ण वातावरण में निर्धारित समयानुसार परीक्षा संपन्न हुई।



