पर्यावरण शुद्धि दिवस के अंतर्गत डॉ. मुनिश्री आलोक कुमार जी ने अपने मंगल उधबोधन में कहा पर्यावरण की शुद्धि का विकास हो पर्यावरण बाहर की शुद्धि भीतर के भी शुद्ध का विकास हो और हमें जागरण सजकता की जरूरत है हम बाहर कचरा फेकते है, फिर हम कॉरपोरेशन को दोस देते हैं कि वह सफाई नहीं करते हमें बाहर कचरा गंदगी नहीं फैलानी है आजकल केमिकल का प्रयोग सब्जी फ्रूट अनाज में ज्यादा होने लगा है पेड़ों पर भी केमिकल का प्रयोग हो रहा है जो पौधा 1 साल में बड़ा होता था अब 3 महीने ही में ही बड़ा हो जाता है सब्जियों में केमिकल केमिकल का ज्यादा छिड़काव होने से हमारे शरीर में जहर जा रहा है हमें ध्यान रखना होगा अहिंसा की चेतना का विकास करना है पर्यावरण चेतना का विकास हो। शुद्ध पर्यावरण के महत्व को आज दुनिया जितनी शिद्दत से अनुभव कर रही है, संभवतः मानव इतिहास में कभी नहीं किया होगा। यह इसलिए है क्योंकि मानव ने पर्यावरण को जितना नुक़सान पिछली एक सदी में पहुँचाया है, उतना कभी नहीं पहुँचाया। भावी पीढ़ियों को पर्यावरण संकट के बढ़ते ख़तरों से बचाना हमारा अहम दायित्व है। आइए, हम स्वयं पर्यावरण शुद्धि का संकल्प लें और दूसरों को भी।
शुद्ध पर्यावरण के महत्व को आज दुनिया जितनी शिद्दत से अनुभव कर रही है, संभवतः मानव इतिहास में कभी नहीं किया होगा। यह इसलिए है क्योंकि मानव ने पर्यावरण को जितना नुक़सान पिछली एक सदी में पहुँचाया है, उतना कभी नहीं पहुँचाया। भावी पीढ़ियों को पर्यावरण संकट के बढ़ते ख़तरों से बचाना हमारा अहम दायित्व है। आइए, हम स्वयं पर्यावरण शुद्धि का संकल्प लें और दूसरों को भी अणुविभा से पुष्पा कटारिया, अणुव्रत समिति अध्यक्ष धर्मेंद्र चोरड़िया मंत्री मुकेश सकलेचा का पूरा योगदान रहा।



