प्रीति जी डाकलिया की सुमुधर आवाज से अणुव्रत के नियम अहिंसा पर गीतिका मंगलाचरण के रूप में प्रस्तुत की। तत्पश्चात प्रेक्षावाहिनी संवाहक एवं तेरापंथी सभा के संगठन मंत्री ओम जी पुगलिया द्वारा साध्वी श्री प्रगतिप्रभा जी एवं प्रणतिप्रभा जी का परिचय दिया।
साध्वी प्रगतिप्रभा जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा आज हमें अपने विद्यालय में आने का सौभाग्य मिला जहां से उन्होंने पढ़ाई की। अहिंसा दिवस पर महात्मा गांधी के अहिंसा के प्रति जागरूकता का भी बताया। अहिंसा का विकास सर्वप्रथम अपने भीतर से किसी दूसरे के प्रति संवेदना से ही हो सकता है और सहिष्णुता भी अहिंसा का आवश्यक बताया।
साध्वी प्रणतिप्रभाजी ने अपने स्थानीय स्कूल के दिन और अपने गुरुजनों को याद करते हुए अहिंसा दिवस पर अपना वक्तव्य दिया। दोनों चरित्रात्माओं के संबोधन ने सभी को मंत्र-मुग्ध कर दिया। सैकड़ों बच्चियों ने शांतिपूर्वक आपके आशीर्वचनों को सुना। प्रधानाध्यापिका श्रीमती सीमा झांब जी ने बहुत प्रसन्नता जाहिर की।
अणुव्रत समिति के अध्यक्ष सूरजप्रकाश जी ने आज के कार्यक्रम के लिए विद्यालय के बच्चो एवम अध्यापक एवम अध्यापिकाओ का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन महिला मंडल की मंत्री एवं अणुव्रत समिति सदस्या सुशीला नाहटा ने किया। कार्यक्रम में अणुव्रत समिति के संरक्षक विजयराज जी दूगड़, तेरापंथ सभा के मंत्री प्रकाश जी डाकलिया, तेयुप मंत्री एवं सीमिती सदस्य रूपेश सुराणा, महिला मंडल से संगीता डाकलिया, मधु पुगलिया आदि उपस्थित थे।

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