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प्रेक्षा प्रवाह-‘शांति एवं शक्ति की ओर’ कार्यशाला का आयोजन : नाथद्वारा

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अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार तेरापंथ महिला मंडल, नाथद्वारा में मुनिश्री सुब्रत कुमार जी स्वामी ठाणा-3 के पावन सान्निध्य में प्रेक्षा शांति एवं शक्ति की ओर कार्यशाला का सफल आयोजन तेरापंथ भवन में हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ मुनिश्री जी ने नमस्कार महामंत्र के मंगल उच्चारण से किया। उसके पश्चात महिला मंडल की बहनों द्वारा प्रेरणा गीत का संगान किया गया।
मुनिश्री सुब्रत कुमार जी स्वामी ने आत्म तत्वों के बारे में मंगल उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने कहा-संपिक्खए अप्पगमप्प एणं यानी आत्मा के द्वारा आत्मा को देखना। प्रेक्षाध्यान का अर्थ है- देखना। हमारी चेतना जो बाहरी जगत में या भौतिक जगत में घूमती रहती है उसे अंतर जगत की ओर ले जाना ध्यान है। भीतर की गहराई में जाना ही ध्यान है। पवित्र ध्यान करने से भीतर की दुष्प्रवृत्तियां दूर होती हैं। ध्यान के साथ दीर्घ श्वास प्रेक्षा व कायोत्सर्ग अति आवश्यक होती है। इससे चित व मन स्थिर हो जाता है, शारीरिक स्फुर्ति आ जाती है, थकान दूर हो जाती है, तनाव से मुक्ति होती है, इंद्रियों में संयम बढ़ता है, रोगों से मुक्ति मिलती है तथा नींद पर कंट्रोल किया जा सकता है। इन सबके नियमित प्रयोग से व्यक्ति अपने आपको गहराई से जान सकता है व अनेक विकारों को दूर कर सकते हैं व आत्म साक्षात्कार को भी प्राप्त किया जा सकता है। रंगों के प्रभाव की जानकारी भी दी।
मुनिश्री मंगल प्रकाश जी ने महाप्राण ध्वनि, कायोत्सर्ग व दीर्घ श्वास प्रेक्षाध्यान का प्रयोग करवाया तथा उनके लाभ भी बताए। तेरापंथ महिला मंडल, नाथद्वारा की अध्यक्षा श्रीमती मंजू जी पोरवाल द्वारा आये हुए सभी बहनों-भाइयों का स्वागत आभार ज्ञापित किया गया तथा तत्व प्रचेता श्रीमती मीना जी कर्णावट ने अपने विचार व्यक्त किया। अंत में आभार महिला मंडल उपाध्यक्ष श्रीमती संगीता जी कोठारी द्वारा किया गया। सभी भाई-बहनों ने भी बड़ी तन्मयता के साथ ध्यान का प्रयोग किया। मंगल पाठ से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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