अणुव्रत अभियान के 77वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में तेरापंथ भवन, वसई में अणुव्रत क्षेत्रीय समिति, वसई द्वारा ‘राष्ट्रीय विकास में अणुव्रत का योगदान’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। साध्वीश्री प्रो. मंगलप्रज्ञाजी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारम्भ साध्वीश्री द्वारा महामंत्रोच्चार से हुआ। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक अणुव्रतों की आवश्यकता के संदर्भ में समाज को झकझोरते हुए साध्वीश्री प्रोफेसर मंगलप्रज्ञाजी ने कहा कि वर्तमान युग में 77 वर्ष पूर्व आचार्य श्री तुलसी द्वारा उद्घोषित अणुव्रत आज भी प्रासंगिक है, किन्तु वर्तमान युग में पनप रही चरित्रहीनता, नशाखोरी एवं अपराधों की भयंकरता की स्तिथि में प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक समाज एवं प्रत्येक देश की अपनी आचार संहिता होनी चाहिए। जयघोषों के साथ आंतरिक दोषों के निवारण के सामूहिक प्रयास अत्यन्त आवश्यक है। वैवाहिक प्रसंगों में अनुचित अपव्यय, अनुचित नृत्य अनुचित कृत्यों पर रोकथाम होनी चाहिए। साध्वीश्रीजी ने उपस्थित परिषद को संकल्प करवाया कि जहां शराब नानवेज आदि का प्रयोग हो आप उस कार्यक्रम में सहभागी न बने, वापस लौट आए। यह एक प्रशस्त समाज की संरचना की ओर अहम कदम है। साध्वीश्रीजी ने कहा कि आज के संदर्भ में अणुव्रत आचार संहिता को हमें न सिर्फ सुनना है, समझना है बल्कि उसे अपने जीवन मे उतार कर क्रियान्वित भी करना है।
साध्वीश्री चेतन्यप्रभाजी ने कहा कि अणु की शक्ति का अहसास हमें है अणु के साथ बम्ब जुड़ जाए तो वो विनाश का कारण बन जाता है, लेकिन उसी अणु के साथ यदि व्रत जुड़ जाए तो वो परिवर्तन की ब्यार ला देता है। मंगलाचरण वसई महिला मंडल द्वारा अणुव्रत गीत से किया गया। स्थानीय अणुव्रत क्षेत्रीय समिति संयोजक श्री भगवतीलाल जी चौहान ने सभी का स्वागत करते हुए अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया। अणुव्रत बैनर का विमोचन स्थानीय सभा संस्थाओं द्वारा किया गया। सभी साध्वीवृंद द्वारा अणुव्रत पर गीतिका का संगान किया गया। महिला मंडल द्वारा लघु नाटिका की प्रस्तुति हुई। तेयुप अध्यक्ष विकास जी इंटोदिया, उपासिका भाग्यश्री जी सूर्या ने अपने भावों की अभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम का संचालन अणुव्रत क्षेत्रीय समिति की पूर्व संयोजिका करुणा जी कोठारी ने किया। कार्यक्रम में भायंदर, वसई, नालासोपारा, विरार के श्रावकों की अच्छी उपस्थिति रही।
