अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार तेरापंथ महिला मण्डल, इरोड द्वारा वाद-विवाद प्रतियोगिता ‘आधुनिक जीवनशैली और पारिवारिक संस्कार-सह-अस्तित्व या संघर्ष’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला का प्रारम्भ नमस्कार महामंत्र से किया। बहनों द्वारा प्रेरणा गीत का संगान किया गया। सहमंत्री प्रज्ञा सुराणा ने सभी बहनों का स्वागत किया।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में जहां एक तरफ प्रज्ञा ने यह बताया कि परिवार का मतलब सारे परिवार के सदस्य किस प्रकार एक छत के नीचे रहते थे। एक-दूसरे से प्रेम मित्रता रखते थे, परंतु अब परिवार का निर्वहन करना बहुत ही मुश्किल हो गया है, इसलिए लोग देश-विदेश जाने लगे हैं जहां प्रज्ञा ने पुरानी कृतियों को थोड़ा रूढ़िवादी बताया वहीं दूसरी तरफ श्रीमती राजुल सुराणा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए यह कहा कि पुराने समय में जब परवरिश की जाती थी तो बच्चे बड़ों का सम्मान करते थे घर की परंपराओं का पालन करते थे। पूजा-पाठ में शामिल होते थे। तीज-त्योहार पर अपने रीति-रिवाज को मानते थे। परंतु अब तो लोग शो ऑफ करने में ही लगे हैं। लोगों में सिर्फ आगे बढ़ने का जज्बा है आधुनिकता की होड़ में लोग अपनी संस्कृति, संस्कार एवं शिष्टाचार को भूलते जा रहे हैं। श्रीमती राजुल सुराणा ने संस्कारों को ना भूलने की भी अच्छी शिक्षा दी। एक उदाहरण के साथ जहां श्रीमती प्रज्ञा सुराणा ने आजकल के इस शादी-विवाह के चलन को यह कहते हुए तथ्य किया कि आजकल सभी लोग इतने पढ़े-लिखे हो गए हैं कि वह अपने जीवन साथी का चुनाव स्वयं करने लगे हैं। वहीं इस बात का विरोधाभास करते हुए श्रीमती राजू सुराणा ने कहा कि जिस प्रकार हमारे माता-पिता ने हमारे लिए जो रिश्ते ढूंढे़ थे वह बहुत ही सफल कारगर हुए हैं, उन्होंने यह भी कहा कि आजकल तो शादी-विवाह का मानो खेल ही रह गया है। अंत में यही निष्कर्ष हुआ कि हमें आधुनिकता की ओर बढ़ना तो है, परंतु अपने पुराने रीति-रिवाज, परंपराओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए। इसमें विजेता प्रज्ञा सुराणा रही। कार्यक्रम में अध्यक्ष पिंकी भंसाली उपस्थित रहीं। मंत्री पूनम दुगड़ ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
