अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जा रही वाद-विवाद प्रतियोगिता के प्रथम चरण जिसका विषय-आधुनिक जीवन शैली और पारिवारिक संस्कार-सह-अस्तित्व या संघर्ष का आयोजन तेरापंथ महिला मंडल, टी-दासरहल्ली द्वारा स्थानीय तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र से हुआ। तत्पश्चात मंडल की बहनों द्वारा प्रेरणा गीत का संगान किया गया। अध्यक्ष नेहा जी चावत ने सभी का स्वागत किया व निर्णायक भी रही। प्रतियोगिता का प्रथम चरण स्थानीय स्टार पर जिसमें प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पूर्णिमा जी कठोतिया ने विषय पर बताया की पारिवारिक संस्कार और आधुनिकता एक-दूसरे का पूरक है। आधुनिक दृष्टिकोण नई दिशा देती है तो संस्कार उस पर चलने का हौसला देती है। अनादि काल से कभी शब्दों में अंतर नहीं आया इसलिए संघर्ष के स्थान पर सौहार्द से सह-अस्तित्व को अपनाओ। दूसरे स्थान पर रही इंद्रा देवी कठोतिया ने बताया कि अच्छे संस्कारों से परिवार के भीतर सह-अस्तित्व वातावरण का निर्माण होता है। यदि अच्छे संस्कार नहीं हों तो आपस में सदैव संघर्ष ही चलता रहता है। मर्यादित जीवन शैली लाखों वर्ष तक जिंदा रहती है। तृतीय स्थान पर रही संगीता जी बोहरा ने आधुनिक जीवन के लाभ से सह-अस्तित्व को जोड़कर बताया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, बेहतर शिक्षा और रोजगार आदि के लाभ व पारिवारिक संस्कार को अंधेरे में प्रकाश का, कठिनाइयों में सहनशीलता का संघर्ष जैसे माध्यम बताया। प्रिया जी पितलिया ने बताया यदि सुंदर जीवन का निर्माण करना है तो हमें सदैव आधुनिक जीवनशैली और संस्कारों के बीच सामंजस्य करना सीखना होगा ताकि कभी भी संघर्ष ना करना पड़े।
मंत्री नम्रता जी पितलिया ने संचालन किया। सभी का आभार व्यक्त संयोजिका इंद्रा देवी कठोतिया ने किया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली बहनों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय व प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मान किया गया। इस कार्यशाला में परामर्शक-संरक्षिका सुशीला बाई बाबेल, कोषाध्यक्ष हंसा जी बाबेल, कार्यकारिणी सदस्य विमला जी पितलिया, किरण जी मेहर भी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता बहुत ही रोचक एवं उत्साहवर्धक रही। सभी ने बहुत ही उत्साह से इसमें भाग लिया।
