अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन में तेरापंथ महिला मंडल, गंगाशहर के द्वारा वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन गंगाशहर सेवाकेंद्र व्यवस्थापिका साध्वीश्री विशदप्रज्ञा जी एवं साध्वीश्री लब्धियशा जी के सान्निध्य में आयोजित किया गया। वाद-विवाद का विषय था-आधुनिक जीवन शैली एवं पारिवारिक संस्कार सह-अस्तित्व या संघर्ष? प्रतियोगियों ने अपने-अपने पक्ष को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया। साध्वीश्री लब्धियशा जी ने कहा कि संस्कारों का आधुनिक जीवन शैली के साथ सामंजस्य होना अनिवार्य है। द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव के प्रभाव से अपने जीवन को संपादित करना चाहिए। साध्वीश्री विशदप्रज्ञा जी ने कहा कि सृष्टि परिवर्तनशील है, समाज में परिवर्तन होता है, वहां प्रबंधन होना अनिवार्य है। जीवन शैली में परिवर्तन स्वाभाविक है, लेकिन परिवार में आपसी प्रेम, विश्वास बना रहता है, तो यह परिवर्तन बाधक नहीं होता। तीन बातें जो हमेशा हमारे भीतर होनी चाहिए वह हैं-आत्म नियंत्रण, आत्मविश्वास और आत्मानुशासन। इससे व्यक्ति स्वयं तथा अपने परिवार दोनों को खुश बना सकता है। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाई श्री जैन कन्या महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. धनपत जी रामपुरिया एवं उदयरामसर स्थित शिव रतन सरकारी विद्यालय के प्रिंसिपल श्री रतन जी छलाणी ने। रामपुरिया जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि शब्द तो सबके पास होते हैं, लेकिन उसे किस तरीके से हम अपनी बात कहने में उपयोग में लाते हैं वह कला होती है, यह कला हर किसी के पास संभव नहीं है। तेरापंथ धर्मसंघ में हमें अपनी कला को निखारने का एक अच्छा प्लेटफार्म मिलता है, इसलिए हमें इसका उपयोग करना चाहिए। रतन जी ने कहा कि हमें अपने बच्चों में संस्कारों का पोषण करना चाहिए ताकि आधुनिक जीवन शैली के नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़े। उन्हें ज्ञानशाला में निरंतर भेजना चाहिए क्योंकि ज्ञानशाला संस्कारों की पाठशाला है। प्रतियोगिता में क्रमशः स्नेहलता सेठिया, दीप्ति लोढ़ा एवं सुनीता पगलिया ने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। महिला मंडल के द्वारा निर्णायकों का साहित्य भेंट करके अभिनंदन किया गया तथा विजेता रही बहनों को पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम मंडल की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती संतोष जी बोथरा के संयोजन में सफल रूप से आयोजित किया गया। मंत्री मीनाक्षी अंचलिया ने सभी का आभार ज्ञापन किया।
