साध्वीश्री गुप्ति प्रभा जी आदि ठाणा-4 के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा निर्देशित प्रेक्षा प्रवाह-शक्ति एवं शांति की ओर कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ महिला मंडल, बोरावड द्वारा किया गया। कार्यशाला की शुरुआत महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण हुई। उपस्थित जनमेदिनी को प्रेक्षाध्यान का महत्व बताते हुए साध्वीश्री गुप्ति प्रभा जी ने कहा कि ध्यान की आवश्यकता योगी, रोगी और भोगी सभी को है। ध्यान एक चार्जर की तरह है जो हमें चार्ज करता है, ऊर्जा का प्रवाह करता है। ध्यान का इतना महत्व है चार मिनिट के ध्यान को भी तीन दिवस के उपवास के समान कहा है। ध्यान का प्रारंभिक प्रयोग है दीर्घ श्वास प्रेक्षा और दीर्घ श्वास के अभ्यास से एकाग्रता बढती है, मनोबल बढ़ता है और आयुष्य भी दीर्घ होता है। अतः ध्यान का प्रयोग जीवन का कर्म बन जाए। गणाधिपति आचार्यश्री तुलसी के इंगित को पाकर प्रेक्षा प्रणेता आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी ने आगमों का गहन अध्ययन कर, प्रयोग कर, प्रेक्षाध्यान का अवदान दिया।
साध्वीश्री मौलिकयशा जी ने ‘प्रेक्षाध्यान क्यों और कैसे’ विषय पर प्रकाश डालते हुये अन्य पद्धतियों की तुलना में प्रेक्षाध्यान की सटीकता और मूल्यवत्ता की व्याख्या की और प्रेक्षाध्यान के प्रयोग कराये। साध्वीश्री भावितयशा जी ने सुमधुर गीतिका के संगान से ध्यान का महत्व बताया। तेरापंथ महिला मंडल व कन्या मंडल द्वारा ‘प्रेक्षाध्यान में ज्ञान-विज्ञान’ विषय पर रोचक प्रस्तुति दी गई। कुशल संचालन अध्यक्षा श्रीमती हर्षा चोरड़िया द्वारा किया गया।
