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मंत्र प्रेक्षा कार्यशाला का आयोजित : तेजपुर

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मुनिश्री प्रशांत कुमार जी, मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल एवं प्रेक्षा फाउंडेशन के तत्वावधान में तेजपुर महिला मण्डल द्वारा मंत्र प्रेक्षा कार्यशाला आयोजित हुई। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा कि मंत्र प्रेक्षा यानी ध्यान के प्रयोग के साथ मंत्र होने से मंत्र प्रेक्षा हो जाती है। सात चक्र पर अलग-अलग रंग, मंत्र, लोगस्स का ध्यान किया जाता है। जीवन में शक्ति का विकास होना जरूरी है। शक्ति के साथ-साथ शांति भी जरूरी है। दोनों का संतुलन बहुत अपेक्षित है। शक्ति को शांति की ओर ले जाना। शक्ति का ऊधर्वारोहण होने से व्यक्ति का सही दृष्टि से विकास होता है। आध्यात्मिक, मानसिक, भावनात्मक, शक्ति ऊपर से नीचे की ओर जाती है तो व्यक्ति का विनाश होता है। मानसिक विकार बढ़ाते है। अनेक प्रयोग प्रेक्षाध्यान में मंत्र प्रेक्षा के मिलते हैं। मन की अस्थिरता का एक बड़ा कारण तामसिक भोजन होता है। उससे मन की चंचलता एवं बुरे विचारों का प्रवाह बढ़ता है। सात्विक भोजन से मन शांत रहता है। अपनी इच्छा पर भी नियंत्रण जरूरी है। उससे ही ध्यान में स्थिरता आती है। ध्यान करने के लिए कई तत्वों का योग जरूरी है। मंत्र प्रेक्षा में नवकार मंत्र के अनेक प्रयोग हैं। मंत्र के साथ-साथ ध्यान के अलग-अलग प्रयोग है। नवकार मंत्र के पांच पदों का भिन्न-भिन्न प्रयोग भी कर सकते है। जिन्हें अपनी शक्ति को बढ़ाना है वह अरिहंत पद का श्वेत रंग पर ध्यान केंद्रित करें। जिन्हें कार्य सिद्धि को पाना है वह णमो सिद्धाणं पद का जाप करें और जिन्हें अपनी नेतृत्व क्षमता का विकास करना है वह णमो आयरियाणं पद का ध्यान पीले रंग के साथ करें। ज्ञान का विकास करना है तो णमो उवज्झायाणं का जाप करें। जिन्हें स्वास्थ्य एवं साधना का विकास करना है वह नीले रंग का ध्यान णमो लोए सव्व साहूणं के पद के साथ करें। ध्यान के प्रयोग के द्वारा हमारी भीतरी शक्तियों का जागरण होता है। व्यक्ति परम आनंद का अनुभव करता है।
मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने कहा कि हमारे जीवन में ध्यान का बहुत महत्व है। हमें दूसरों की जिंदगी में झांकने की आदत है लेकिन स्वयं को देखना भूल जाते है। हम अपने आप को देखना सीखें। हम अपने आप को जानना सीखें। ध्यान की गहराई में जाने के लिए एकाग्रता, भोजन, रंग, स्थान सबका महत्व होता है। रंग से व्यक्ति का व्यक्तित्व बनता है। शुक्ल ध्यान की साधना करें। ध्यान सिर्फ प्रक्रिया ही नहीं है अपितु अपने आप को खोकर सब कुछ पाने की पद्धति है। प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास करने से व्यक्ति साधना का विकास कर सकता है।
कार्यशाला का शुभारंभ महिला मण्डल की बहनें श्रीमती देवाश्री बैद, श्रीमती निधि बैद के प्रेक्षा गीत से हुआ। आभार महिला मण्डल मंत्री श्रीमती मीना धारीवाल ने किया। कार्यशाला का संचालन श्रीमती प्रियंका धारीवाल ने किया।

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