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आत्मा के लिए अच्छी है सच्चाई व मैत्री भावना : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

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– 11 कि.मी. का विहार कर महातपस्वी पहुंचे भचाऊ

– ज्योतिचरण के पदार्पण से पावन बना स्वामीनारायण गुरुकुल

22 मार्च, 2025, शनिवार, भचाऊ, कच्छ (गुजरात)।
कच्छ की धरा वर्तमान समय में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य, शांतिदूत, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की चरणरज से पावनता को प्राप्त हो रही है। कच्छ के बड़े नगर व कस्बे ही नहीं, गांव-गांव भी पावनता को प्राप्त हो रहे हैं। खारे पानी से युक्त इस क्षेत्र में आचार्यश्री के श्रीमुख से निरंतर प्रवाहित होने वाली ज्ञानगंगा जन-जन के मानस को आप्लावित कर रही है। जन-जन को मंगल आशीष व दर्शन से लाभान्वित करते हुए आचार्यश्री पुनः पूर्वाभिमुख होकर गतिमान हो चुके हैं।
शनिवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपनी धवल सेना के साथ चिराई नानी से मंगल प्रस्थान किया। जन-जन को मंगल आशीष से आच्छादित करते हुए आचार्यश्री लगभग ग्यारह किलोमीटर का विहार कर भचाऊ में स्थित स्वामीनारायण गुरुकुल में पधारे। आचार्यश्री के आगमन से संबंधित लोग अत्यंत आह्लादित थे। उन लोगों ने आचार्यश्री का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।
स्वामीनारायण गुरुकुल परिसर में आयोजित प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित श्रद्धालु जनता को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि शास्त्र में दो बातें बताई गई हैं-स्वयं सत्य को खोजें और प्राणियों के प्रति मैत्री का भाव रखें। स्वयं सत्य की खोज करना कठिन हो सकता है। जो स्वयं सत्य खोज लेते हैं, वे केवलज्ञानी बन जाते हैं। तीर्थंकर सर्वज्ञ होते हैं, केवलज्ञानी होते हैं। तीर्थंकर अथवा सर्वज्ञ को दूसरों का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं होती है। स्वयं सत्य का साक्षात्कार करने का मतलब है कि उसे किसी दूसरे का आलम्बन नहीं लेना पड़ता है। आदमी को व्यवहार जगत में स्वयं यथार्थ को जानने का प्रयास करना चाहिए।
अपना ज्ञान अपना ही होता है। ज्ञान को चक्षु के समान कहा गया है। इसलिए आदमी को स्वयं के ज्ञान के वर्धन का प्रयास करना चाहिए। आदमी को सभी प्राणियों से मैत्री की भावना रखने का प्रयास करना चाहिए। अनावश्यक रूप में किसी भी प्राणी की हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए। सबके प्रति करुणा का भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। सभी प्राणियों के प्रति मैत्री की भावना का विकास रखने का प्रयास करना चाहिए। गृहस्थ जीवन में जितना संभव हो सके, फालतू जीव की हिंसा न हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए। सभी प्राणियों के साथ मैत्री की भावना रखने का प्रयास करना चाहिए। मैत्री की भावना और सच्चाई की साधना से आत्मा अच्छी रह सकती है। इस प्रकार आदमी अपने जीवन को और अच्छा बनाने का प्रयास करे, यह काम्य है।
मंगल प्रवचन के उपरांत गुरुकुल के शास्त्री श्री कृष्णादासजी स्वामी, ट्रस्टी व भाजपा के भचाऊ प्रमुख श्री वागजीभाई आहीर, जिला पंचायत प्रमुख श्री कनकसिंह ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी।

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