परम श्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमण जी के सूरत चातुर्मास की सफल परिसंपनता के पश्चात दिल्ली 2027 पूज्यप्रवर के पावन चातुर्मास की पूर्व तैयारी हेतु गुरुदेव के निर्देश अनुसार दिल्ली की ओर अग्रसर बहुश्रुत मुनि श्री उदित कुमार जी स्वामी मर्गास्थ क्षेत्रों का स्पर्श करते हुए अहमदाबाद पधारे।
जहां मुनिश्री के सान्निध्य में अहमदाबाद समाज ने विशेष कार्यशाला संप्रेरणा समारोह का आयोजन किया। जिसका विषय था-‘पूज्यवर का प्रवास-कैसे बनाएं खास’। विषयगत अपने मंगल उद्बोधन में मुनिश्री ने कहा कि जहां-जहां परम पूज्य गुरुदेव का प्रवास, पावन पदार्पण होता है। वहां के लोगों के जीवन के लिए एक वह विशेष अमूल्य क्षण होता है। कहते हैं कि महान लोगों के पावन चरण जिस धरती पर पड़ जाएं, वह धरती देवभूमि कहलाती है। वैसे ही परम पूज्य गुरुदेव का चार माह से कुछ अधिक का यह अहमदाबाद चातुर्मास अहमदाबाद वासियों के लिए एक वरदान है। पूज्यवर जहां पधारते हैं वहां एक अलग ही रौनक होती है। पूज्य प्रवर का चाहे एक दिन का हो या चातुर्मास हो, हर प्रवास ऐतिहासिक ही होता है। अहमदाबाद का यह प्रवास भी ऐतिहासिक ही होगा क्योंकि गुरुओं के अतिशय अमाप्य होता है। कार्यकर्ता तो यह सोचे कि हम इस ऐतिहासिकता में कैसे जुड़ सकते हैं। कार्यकर्ता प्रयास करें कि वह ज्यादा से ज्यादा समय सेवा में देकर, अपने दायित्व एवं अपनी जिम्मेदारी, कर्तव्य को समझ कर अपने कौशल का पूर्णतया सम्यक उपयोग कर इस चातुर्मास की ऐतिहासिकता में स्वयं भी योगभूत बनें। तभी सही मायने में पूज्यवर के इस खास प्रवास को स्वयं के लिए भी खास बना पाएंगे और एक नया माइलस्टोन सेट कर सकेंगे। मुनिश्री ने कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह का संचार करते हुए माइक्रो मैनेजमेंट के कई सूत्र प्रदान किये। प्रवचन से पूर्व मुनिश्री ने हाजिरी का वाचन किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं द्वारा मंगलाचरण से हुआ। मुनिश्री ज्योतिर्मय कुमार जी ने अपने विषयगत विचार व्यक्त किए। जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा कांकरिया-मणिनगर के अध्यक्ष श्री चंपालाल जी गांधी ने ने मुनिश्री के स्वागत में अपनी भावना व्यक्त की। ज्ञानशाला के प्यारे ज्ञानार्थियों द्वारा नन्ही सी प्रस्तुति की गई। सभा मंत्री श्री सचिन सुराणा ने आभार ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन श्री नलिन दुगड़ ने किया।



