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नवकार महामंत्र में पांच विशिष्ट आत्माओं की वंदना : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

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– विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर शांतिदूत ने कराया नमस्कार महामंत्र का जप

– 12 कि.मी. का विहार कर भाभर में पधारे युगप्रधान आचार्यश्री

– महाजनवाडी पूज्यचरणों से हुई पावन, यहीं होगा द्विदिवसीय भाभर प्रवास

9 मार्च, 2025, बुधवार, भाभर, वाव-थराद (गुजरात)।
गुजरात की धरा पर गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को अपनी धवल सेना के साथ पाटन जिले में स्थित इन्दरवा नवा गांव से मंगल प्रस्थान किया। मार्ग में लोगों को दर्शन और मंगल आशीष से लाभान्वित करते हुए शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी गुजरात के एक और जिले वाव-थराद की सीमा में प्रवृष्ट हुए तो वाव-थराद की धरती गुरुचरणों का स्पर्श पाकर निहाल हो उठी। इसके साथ ही आचार्यश्री की वाव-पथक की यात्रा प्रारम्भ हुई। वाव-पथक के श्रद्धालु अपने आराध्य को अपने क्षेत्र में पाकर आह्लादित हो उठे। आचार्यश्री लगभग 12 किलोमीटर का विहार कर भाभर में स्थित श्री रघुवंशी देसी लोहाना महाजनवाडी में पधारे। भाभरवासियों ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया।
महाजनवाडी परिसर में बने महावीर समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुजनों को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन संबोध प्रदान करते हुए कहा कि नवकार महामंत्र में पांच प्रकार की विशिष्ट आत्माओं को नमन किया गया है। इनमें अर्हत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सर्व साधु होते हैं। अर्हत् जो चार घाति कर्मों का क्षय कर चुकी हैं, तीर्थंकरत्व को उपलब्ध हो चुकी हैं। चौबीस तीर्थंकर इस अवसर्पिणी के भरतक क्षेत्र में हो चुके हैं। तीर्थंकर अध्यात्म जगत का संभवतः वह व्यक्तित्व होता है, जिससे बड़ा कोई आध्यात्मिक व्यक्ति अधिकृत नहीं होता। भौतिक जगत का उत्कृष्ट व्यक्ति चक्रवर्ती होता है। कोई-कोई मनुष्य एक ही जन्म में चक्रवर्ती और तीर्थंकर भी बन जाते हैं। भगवान शांतिनाथ प्रभु एक उदाहरण हैं। सिद्ध भगवान जो आठों कर्मों से मुक्त मोक्षगामी आत्माएं होती हैं। जिनका सब प्रयोजन मानों सिद्ध हो गया है।
पांच पदों के मध्य में आचार्य होते हैं। तीर्थंकर के प्रतिनिधि कहलाते हैं। संघ का नेतृत्व करना आदि अनेक जिम्मेवारी निभाते हैं। वे तीर्थंकर के वाणी के प्रवक्ता होते हैं। उपाध्याय वे हैं जो आगमों के अध्ययन-अध्यापन में रत रहने वाले होते हैं, ज्ञानमूर्ति, विद्यामूर्ति होते हैं। लोक के समस्त साधुओं को जो साधना करने वाले होते हैं, पांच महाव्रतों का पालन करने वाले साधुओं को नमस्कार किया गया है। ये पांच प्रकार की विशिष्ट आत्माएं होती हैं। इस नवकार का अपना महत्त्व है। आज 9 अप्रैल है। जैन इण्टरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन संस्था के द्वारा विश्व नवकार दिवस के रूप में एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह मंत्र प्रचलित पाठ है। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने नमस्कार महामंत्र का जप भी कराया। आचार्यश्री के इस जप में उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
इस अवसर पर आचार्यश्री के स्वागत में साध्वी सिद्धांतश्रीजी ने अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए अपनी सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का भी संगान किया। श्री शशिकांतभाई मोदी, श्री रघुवंशी देसी लोहाना महाजनवाडी के प्रमुख श्री हरीभाई आचार्य ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। वाव-पथक की महिला समाज द्वारा स्वागत गीत का संगान किया गया।
भाभर नगरपालिका प्रमुख श्री वलूभाई राठौड़, गुजरात भाजपा की प्रदेशी मंत्री श्रीमती नौकाबेन प्रजापति ने आचार्यश्री के स्वागत में अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। श्री प्रतीक परिख व नव्या परिख ने अपनी प्रस्तुति दी। वाव-पथक के संयोजक श्री दिलीप सिंघवी, संरक्षक श्री प्रवीणभाई मेहता ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। भाभर तेरापंथ महिला मण्डल व वाव पथक महिला मण्डल ने गीत का संगान किया।

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